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अधिक होशियार। अधिक मजबूत। अधिक स्वस्थ

ये शब्द पूरी दुनिया के लोगों के लिए खाद्य समृद्धीकरण पहल के विज़न का वर्णन करते हैं।

सार्वजनिक, निजी तथा नागरिक साझेदारी के रूप में, हम देश के लीडरों को समृद्धीकरण कार्यक्रमों की योजना बनाने, उनका क्रियान्वयन करने तथा निगरानी करने में सहायता करते हैं। हमारा ध्यान औद्योगिक रूप से मिल किए गए आटे, मक्की के आटे और चावल पर केन्द्रित है।

समृद्धीकरण क्यों?

पोषक तत्वों की कमी द्वारा होने वाले एनीमिया तथा अपर्याप्त फॉलिक एसिड के कारण उत्पन्न न्यूरल ट्यूब जन्म दोष से बचाव के लिए अनाज उत्पादों में विटामिन तथा खनिजों को मिलाया जाता है। बढ़ा हुआ पोषण प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है और उत्पादकता व संज्ञानात्मक विकास को बेहतर करता है।

गेहूं तथा मक्की के आटे और चावल का समृद्धीकरण सफल है, क्योंकि उपभोक्ताओं द्वारा उनकी आदत को बदलने पर निर्भर हुए बिना यह आम तौर पर खाए जाने वाले खाद्यों को अधिक पोषक बनाता है।

अनाजों को समृद्ध करने के चार मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. पोषक एनीमिया की रोकथाम
  2. न्यूरल ट्यूब जन्म दोषों से बचाव
  3. उत्पादकता बढ़ाना
  4. आर्थिक प्रगति करना

समृद्धीकरण देश की देश की पोषण रणनीति का एक हिस्सा हैं, जिसे यूनीसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ), अमरीकी रोग नियंत्रण तथा रोकथाम केन्द्र (सीडीसी), बढ़ा हुआ पोषण के लिए वैश्विक साझेदारी (जीएआईएन) तथा सूक्ष्म पोषक पहल जैसे वैश्विक संगठनों का समर्थन हासिल है।

समृद्धीकरण की योजना बनाएं

समृद्धीकरण पर विचार करने वाले देश के लिए हमारी पहली अनुशंसा राष्ट्रीय गठजोड़ बनाने की है। सार्वजनिक, निजी तथा नागरिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले राष्ट्रीय लीडरों से सहभागिता तथा प्रतिबद्धता का प्रयास करें।

पक्का करें कि प्रत्येक हितधारक, समृद्धीकरण के स्वास्थ्य संबंधी व आर्थिक लाभों को समझे। सभी क्षेत्रों को प्रक्रिया की शुरुआत में शामिल करना प्रमुख जानकारियों की अनदेखी से बचाव करता है। यह प्रत्येक समूह की ओर से काम की सफलता की ओर प्रतिबद्धता का निर्माण भी करता है।

नियोजन के समय ध्यान देने वाले विषयों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पोषणः आपके देश में पोषण कमियों पर आंकड़ों का विश्लेषण करें और उन कमियों को संबोधित करें, जिनको निर्धारित किया जा सकता है।
  • उपलब्धता: आम तौर पर खाए जाने वाले खाद्यों पर विचार करें और स्पष्ट करें कि जरूरी स्वास्थ्य प्रभाव के निर्माण के लिए किस खाद्य को समृद्ध करें।
  • उद्योग: समृद्धीकरण की शुरुआत व स्थायित्व के लिए, अपने देश में बड़ी मिलों की संख्या तथा उनकी जरूरत के उपकरण व प्रशिक्षण का निर्धारण करें।
  • मानक: देश के लिए एक मानक तय करें, जो यह निर्दिष्ट करे कि अनाज में क्या पोषक तत्व शामिल किए जाएं तथा प्रत्येक पोषक तत्व की कितनी मात्रा को शामिल किया जाए।
  • विधान (कानून): जरूरी स्वास्थ्य प्रभाव पैदा करने के लिए ऐच्छिक समृद्धीकरण से अनिवार्य समृद्धिकरण बेहतर होता है। समृद्धीकरण कानून का निर्माण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
  • संचार: रणनीतिक रूप से यह विचार करें कि समर्थन हासिल करने के लिए प्रमुख निर्णयकर्ताओं को किस तरह से प्रभावित किया जाए।

प्रभावी रूप से लागू करें

मिल के मालिकों को देश की समृद्धीकरण चर्चाओं की शुरुआत में शामिल करना, समृद्धीकरण को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए महत्वपूर्ण है। उद्योग के लीडर यह सुनिश्चित करने में सहायक हो सकते हैं कि लागू किए जाने के लिए सिफारिश किये गये मानक व्यवहारिक होंगे। राष्ट्रीय स्तर के समृद्धीकरण को लागू करने तथा इस प्रयास के स्थायी होने को सुनिश्चित करने में राष्ट्रीय मिलिंग एसोसिएशन सहायक हो सकती है। 

गुणवत्ता नियंत्रण के लिए प्रक्रियाओं की स्थापना, प्रभावी समृद्धीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

औद्योगिक रूप से मिल की प्रक्रिया से गुजरने वाले गेहूं तथा मक्की के आटे में विटामिन व खनिजों को मिलाने के लिए, मिल मालिक उसी तकनीकी प्रक्रिया का उपयोग करते हैं, जिसे वे बेहतर आटा रखरखाव या अधिक लंबी शेल्फ लाइफ के लिए तत्वों को मिलाने में उपयोग करते हैं। परिणामस्वरूप आधुनिक मिल मालिक, समृद्धीकरण के लिए जरूरी उपकरण तथा विशेषज्ञता जरूरतों से परिचित हैं।

समृद्ध चावल के निर्माण के लिए सबसे पहले निष्कर्षण या लेपन तकनीक द्वारा समृद्ध चावल गुठली (kernel) को बनाया जाता है। इसके बाद समृद्ध गुठली को एक निर्दिष्ट अनुपात में गैर-समृद्ध चावल के साथ मिलाकर उपभोक्ताओं के लिए पैक किया जाता है। यदि पकाए जाने से पहले चावल को धोया नहीं जाता है या चावल को अधिक पानी में नहीं पकाया जाता है, तो डस्टिंग तकनीक उपलब्ध हैं।

जब समृद्धीकरण अनिवार्य होता है, तो विपणन (मार्केटिंग) की ज़रूरत होती है। हालांकि कुछ देश अपनी संचार योजना में उपभोक्ता शिक्षा या सामाजिक विपणन (सोशल मार्केटिंग) को शामिल करते हैं। इसके विपरीत, प्रत्येक समृद्धिकरण कार्यक्रम के साथ रणनीतिक निर्णयकर्ताओं को प्रभावित करने के लिए एक संचार योजना की जरूरत होती है।

गुणवत्ता की निगरानी करें

यदि गुणवत्ता उपायों का नियमित रूप से पालन होता है, परिणामों का विश्लेषण होता है और समस्याओं का समाधान किया जाता है, तो समृद्धीकरण का स्वास्थ्य पर अधिकतम प्रभाव पड़ेगा। इस प्रक्रिया में खाद्य नियंत्रण तथा कार्यक्रम निगरानी शामिल है।

खाद्य नियंत्रण में निम्नलिखित शामिल है:

  • आंतरिक: गुणवत्ता जांच करने के लिए, आटा मिल वाले प्रीमिक्स के उपयोग को दर्ज करने तथा आयरन स्पॉट टेस्ट जैसी प्रक्रियाएं अपनाते हैं।
  • बाहरी: सरकारी अधिकारी (जैसे खाद्य सुरक्षा निरीक्षक) समय-समय पर मिलों में उत्पादों का परीक्षण करके यह सुनिश्चित करते हैं कि समृद्धीकरण का स्तर देश के विनिर्देशों के अनुसार हो।
  • वाणिज्यिक: बाज़ार में समृद्ध उत्पाद की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा निरीक्षक रिटेल स्टोरों की जांच करते हैं।

कार्यक्रम निगरानी में निम्नलिखित शामिल है:

  • अंतर्ग्रहण: घरेलू सर्वेक्षण यह पुष्टि करते हैं कि समृद्ध चावल या समृद्ध आटे से बने खाद्य खरीदे जा रहे हों, लोग उनको खा रहे हों और इच्छित प्रभाव हासिल के लिए पर्याप्त मात्रा खायी जा रही हो।
  • प्रभाव: यदि उत्पादों को अनुशंसित पोषक स्तरों तक समृद्ध किया जाता है और कम से कम 80% जनसंख्या उत्पादों को खरीद रही हो, तो देश जैविक व नैदानिक परिणामों के प्रभाव मूल्यांकन पर विचार कर सकते हैं। नियमित जनसांख्यिकी तथा स्वास्थ्य सर्वेक्षण या जन्म दोष निगरानी कार्यक्रम, सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम के प्रभाव के प्रभाव का संकेत दे सकते हैं।